Centre of Acharya Bharat Muni Sanchar
(आचार्य भरतमुनि संचार शोध केन्द्र)

परिचय :

संचार मानव की नैसर्गिक आवश्यकता है एवं संपूर्ण मानवी सृष्टि संचरण की अनिवार्यता से अभिप्रेरित है। वर्तमान संचार की जब चर्चा होती है तो सर्वप्रथम दृष्टि पाश्चात्य विचारकों एवं उनके द्वारा प्रतिपादित विविध संचार सिद्धांतों पर जाती है। भारतीय संदर्भ की अगर बात करें तो विविध ग्रंथों पर हाल में हुए प्रारंभिक स्तर के अध्ययन एवं शोध कार्यों से यह स्पष्ट हुआ कि संचार के बहुतेरे सिद्धांत भारतीय ज्ञान परंपरा एवं मनीषा में असंगठित रूप में उपलब्ध हैं। उदाहरण के रूप में भरतमुनि का नाट्यशास्त्र, श्रीमद्भगवतगीता का विश्वरूप, कठोपनिषद् में यम-नचिकेता संवाद, संपूर्ण प्रश्नोपनिषद्, महाकवि कालिदास की रचनाएं, चाणक्य नीति, विदुर नीति, नारद रचित भक्तिसूत्र, अशोक का जनसंपर्क प्रारूप समेत बहुतेरे अन्यान्य ग्रंथ एवं रचनाएं। यह वर्तमान युग की आवश्यकता है कि इन संचार सूत्रों एवं सिद्धांतों को एकीकृत, संकलित एवं परिमार्जित किया जाएं जिससे संचार के क्षेत्र में भी भारतीय मनीषा के अवदान से संपूर्ण विश्व को अवगत कराया जा सके।

उद्देश्य :

  • भारतीय संचार दर्शन की विविध परंपराओं का अध्ययन, मूल्यांकन, वर्गीकरण एवं समीक्षा करना तथा प्राप्त निष्कर्षों की पुस्तक, शोध आलेख, प्रतिवेदन के रूप में प्रस्तुति/प्रकाशन।
  • वैदिक ग्रंथों, उपनिषद्, पुराण, महाकाव्य एवं अन्य प्रामाणिक ग्रंथों में उपलब्ध संचार सूत्रों एवं सिद्धांतों की खोज करना तथा प्राप्त निष्कर्षों की पुस्तक, शोध आलेख, प्रतिवेदन के रूप में प्रस्तुति/ प्रकाशन ।
  • वैदिक आचार्यों, महाकवियों, लेखकों एवं महत्तम व्यक्तित्वों पर केन्द्रित वैयक्तिक अध्ययन करना, संचार के क्षेत्र में उनके अवदानों को रेखांकित करना तथा प्राप्त निष्कर्षों की पुस्तक, शोध आलेख, प्रतिवेदन के रूप में प्रस्तुति/ प्रकाशन ।
  • भारतीय मनीषा के संचार के क्षेत्र में समग्र अवदान का अध्ययन करना एवं उसकी वर्तमान संचार परिदृश्य से साम्यता स्थापित करना तथा प्राप्त निष्कर्षों की पुस्तक, शोध आलेख, प्रतिवेदन के रूप में प्रस्तुति/प्रकाशन |
  • बिहार एवं चंपारण केन्द्रित विविध संचारोपयोगी अध्ययन करना तथा प्राप्त निष्कर्षों की पुस्तक, शोध आलेख, प्रतिवेदन के रूप में प्रस्तुति/प्रकाशन ।