Maharshi Patanjal Yoga ewam Ayurved Centre
(महर्षि पतञ्जलि योग एवं आयुर्वेद अध्ययन केन्द्र)

प्रस्तावना -

योगेन चित्तस्य पदेन वाचां मलं शरीरस्य च वैद्यकेन।
योऽपाकरोत्तं प्रवरं मुनीनां पतञ्जलिं प्राञ्जलिरानतोऽस्मि॥

(पतञ्जलिचरितम्)



भारतीय ज्ञान परम्परा में प्राचीन काल से ही योग एवं आयुर्वेद को समान दार्शनिक पृष्ठभूमि से उद्भूत सर्वोच्च विज्ञान माना गया है। यह विज्ञान शास्त्रीय दृष्टि से जितना प्राचीन है, उपयोग की दृष्टि से उतना ही नित्य है, नवीन है। मानवीय शरीर और मन दोनों को स्वस्थ एवं प्रसन्न रखते हुए धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इस पुरुषार्थ-चतुष्ट्य की सिद्धि का सामर्थ्य प्राप्त करने हेतु ऋषियों द्वारा वैदिक-विज्ञान पर आधारित अष्टाङ्ग-योग एवं आयुर्वेद का प्रणयन किया गया है। यही कारण है कि भारतवर्ष में प्राचीन काल से ही योग एवं आयुर्वेद के पठन-पाठन की सुव्यवस्थित एवं समृद्ध परम्परा रही है।

वेदों एवं उपनिषदों में वर्णित योगशास्त्र की सम्पूर्ण परम्परा को महर्षि पतञ्जलि ने अपने योगसूत्रों (पातञ्जल-योगदर्शनम्) में उपनिबद्ध किया है, जिसमें अष्टाङ्ग-योग की वैज्ञानिक प्रक्रिया का साङ्गोपाङ्ग विवेचन उपलब्ध होता है। इसी तरह वर्तमान आयुर्वैदिक चिकित्सा पद्धति में ‘चरक-संहिता’, ‘सुश्रुत-संहिता’ और ‘अष्टाङ्ग-हृदयम्’ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। चरक-संहिता के मूल उपदेष्टा आत्रेय पुनर्वसु ग्रन्थकर्त्ता अग्निवेश और प्रतिसंस्कर्त्ता महर्षि चरक को माना जाता है। वस्तुतः चरक नाम एक पूरी ऋषि-परम्परा को द्योतित करता है। अष्टाङ्ग-हृदयम् के रचयिता वाग्भट्ट हैं।

वर्तमान में भी यद्यपि बहुत से विश्वविद्यालयों में दर्शनशास्त्र के अङ्ग के रूप में पातञ्जल योगदर्शन एवं आयुर्वेद के कुछ अंशों का अध्यापन कराया जाता है, कुछ संस्थाएँ भी योग एवं आयुर्वेद की दिशा में महत्त्वपूर्ण कार्य कर रही हैं किन्तु उच्च शिक्षा की मुख्य धारा में संस्कृतेतर अन्यान्य विषयों के छात्रों एवं सामान्य जनों को भी योग एवं आयुर्वेद के सैद्धान्तिक ज्ञान के साथ-साथ प्रायोगिक पक्ष की भली-भांति जानकारी प्रदान करते हुए इस महनीय परम्परा के संरक्षण और संवर्धन की अत्यन्त आवश्यकता है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए महात्मा गाँधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय, बिहार के संस्कृत विभाग के निर्देशन में महर्षि पतञ्जलि योग एवं आयुर्वेद अध्ययन केन्द्र की स्थापना की गई है। इस केन्द्र के संयोजक के रूप में डॉ. श्याम कुमार झा एवं सहसंयोजक के रूप में डॉ. विश्वेश वाग्मी को नियुक्त किया गया है।

केन्द्र के उद्देश्य-

महर्षि पतञ्जलि योग एवं आयुर्वेद अध्ययन केन्द्र के उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

  • योग एवं आयुर्वेद से सम्बन्धित मूल संस्कृत ग्रन्थों का अध्ययन कर उसके चिकित्सकीय एवं प्रायोगिक पक्षों को प्रकाशित करना।
  • मानव-स्वास्थ्य के क्षेत्र में समसामयिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अष्टाङ्ग-योग एवं आयुर्वेद से सम्बन्धित कार्यशालाओं, संगोष्ठियों एवं शिविरों का आयोजन करना।
  • आयुर्वेद के मुख्य प्रयोजन- ‘स्वस्थस्य स्वास्थ्यरक्षणम् आतुरस्य विकारप्रशमनञ्च’ (स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य को बनाए रखना एवं रोगी व्यक्ति के रोगनिदान) को ध्यान में रखते हुए आयुर्वेदीय चिकित्सा पद्धति का प्रचार-प्रसार करना।
  • स्थानीय जडी-बूटियों के प्रयोग एवं संरक्षण की दिशा में गहन शिक्षण-प्रशिक्षण एवं शोधकार्य को बढ़ावा देना।
  • आधुनिक चिकित्सा पद्धति (एलोपैथ आदि) के गुण-दोषों का आकलन करते हुए समाज में मानवीय प्रकृति के अनुकूल भारतीय चिकित्सा पद्धति एवं दिनचर्या में योग को अनिवार्य रूप से सम्मिलित करने के प्रति जागरुकता प्रदान करना।
  • आधुनिक चिकित्सा विज्ञान एवं भारतीय परम्परागत योग एवं आयुर्वेद के ज्ञान में सामञ्जस्य स्थापित करते हुए मानसिक अवसाद और शारीरिक समस्याओं के समाधान का प्रयास करना ।
  • विश्वविद्यालय के वनस्पति-विज्ञान एवं जैव-विज्ञान आदि विभागों के साथ सामञ्जस्य स्थापित करते हुए योग एवं आयुर्वेद से सम्बन्धित अन्तर्विद्यावर्त्ती शोध को बढावा देना।
  • वैश्विक ज्ञान-परम्परा में भारतीय योग-विद्या एवं आयुर्वेद के महत्त्व को स्थापित करते हुए उसका विश्वव्यापी प्रचार-प्रसार करना ।
  • योग एवं आयुर्वेद से सम्बन्धित (विशेष रूप से बिहारप्रान्त में उपलब्ध) पाण्डुलिपियों/हस्तलिपियों का संरक्षण करना ।
  • योग एवं आयुर्वेद से सम्बन्धित भारत एवं विश्व में हो रहे कार्यों का अनुशीलन तथा संकलन करना।
  • आधुनिक चिकित्सा-शास्त्र की प्रगति में भारतीय मूलस्रोतों की भूमिका का अध्ययन करना।
  • योग एवं आयुर्वेद से सम्बन्धित समस्त सामग्री का एकत्रीकरण एवं आवश्यकतानुसार प्रकाशन करना।
  • योग एवं आयुर्वेद के क्षेत्र में कार्यरत पतञ्जलि योग विद्यापीठ, हरिद्वार एवं बिहार योग विश्वविद्यालय, मुंगेर जैसी संस्थाओं के साथ सहमति-ज्ञापन (MoU) स्थापित करना।
  • विश्वविद्यालय में योग कक्षाओं का आयोजन करना।
  • आयुर्वेदिक चिकित्सालय की स्थापना का प्रयास करना।

केन्द्र द्वारा प्रस्तावित कार्ययोजना –

महर्षि पतञ्जलि योग एवं आयुर्वेद अध्ययन केन्द्र द्वारा संकल्पित उद्देश्यों की पूर्त्ति एवं केन्द्र के सम्यक् संचालनार्थ निम्नलिखित कार्ययोजना प्रस्तुत है-

  • समय-समय पर प्रशिक्षित योगाचार्यों के द्वारा विश्वविद्यालय प्राङ्गण में योग-शिविरों एवं कार्यशालाओं का आयोजन।
  • आयुर्वेद से सम्बन्धित कार्यशालाओं एवं प्रशिक्षण वर्गों का आयोजन।
  • राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों का आयोजन ।
  • योग एवं आयुर्वेद के क्षेत्र में कार्यरत विशिष्ट संस्थानों के साथ सहमति-ज्ञापन (MoU) स्थापित करना।
  • विश्वविद्यालय के छात्रों को योग एवं आयुर्वेद के क्षेत्र में शोधकार्य करने हेतु प्रेरित करना एवं उचित मार्गदर्शन प्रदान करना।
  • आरम्भिक रूप से एक लघु पुस्तकालय की स्थापना ।
  • योग एवं आयुर्वेद से सम्बन्धित एक ‘षाण्मासिक प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम (Six months certificate course)’ हेतु विशेष कक्षाओं का आयोजन।
  • विश्वविद्यालय परिसर में समय-समय पर आयुर्वैदिक निःशुल्क चिकित्सा की व्यवस्था करना।
  • विश्वविद्यालय में जड़ी-बूटी एवं औषधीय उद्यान का विकास करना।
  • योग एवं आयुर्वेद से सम्बन्धित विशिष्ट संस्थानों में शैक्षिक-भ्रमण कराने की व्यवस्था करना।